Swami Vivekananda Thoughts in Marathi | स्वामी विवेकानंद सुविचार मराठी मध्ये

स्वामी विवेकानंद सुविचार मराठी मध्ये 



स्वतः चा विकास करा. ध्यानात ठेवा, गती आणि वाढ हीच जिवंतपणाची लक्षणे आहेत. -  स्वामी विवेकानंद

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अगदी सरळमार्गी असणे हेही एक प्रकारचे पापच आहे.हे पाप कालांतराने मनुष्याच्या दुर्बलतेचे कारण बनते .  -  स्वामी विवेकानंद

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आपले मन आपल्या लाडक्या मुलाप्रमाणे असते, ज्या प्रमाणे लाडकी मुले नेहमी असंतुष्ट असतात. त्या प्रमाणे आपले मन नेहमी अतृप्त असते म्हणूनच मनाचे लाड कमी करा, व त्याला सतत लगाम घाला. -  स्वामी विवेकानंद

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आपल्याला अनंत शक्ती, असीम उत्साह, अपार सहस आणि धीर पाहिजे. तरच आपल्याकडून महान कार्ये होतील. -  स्वामी विवेकानंद

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चांगल्या पुस्तकाविना घर म्हणजे दुसरे स्मशानच होय. -  स्वामी विवेकानंद

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तारुण्याचा जोम अंगी आहे तोवरच कोणतीही गोष्ट शक्य होईल कार्याला लागण्याची अत्यंत उचित अशी हीच वेळ आहे. -  स्वामी विवेकानंद

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दु:खी माणसाला मदत करण्यासाठी लांबवलेला एक हात प्रार्थने साठी जोडलेल्या दोन हातां पेक्षा अधिक उपयुक्त आहे. -  स्वामी विवेकानंद

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देशातील दारिद्र व अज्ञान घालविणे म्हणजेच ईश्वराची सेवा होय. -  स्वामी विवेकानंद

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दैव नावाची कोणतीही गोष्ठ नाही आपल्याला जबरद्स्तीने काही करावयास भाग पाडील अशी कोणतीही गोष्ट या जगात नाही. -  स्वामी विवेकानंद

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धर्म म्हणजे मानवी अंत:करणाच्या विकासाचे फळ आहे. यास्तव धर्माचा प्रमाणभूत आधार पुस्तक नसून मानवी अंत:करण आहे. -  स्वामी विवेकानंद

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परमेश्वर नेहमी कृपाळूच असतो जो अत्यंत शुद्ध अंत:करणाने त्याची मदत मागतो त्याला ती निश्चितपणे मिळत असते. -  स्वामी विवेकानंद

Swami Vivekananda Real Photos


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पैसा असणाऱ्या श्रीमंत आणि प्रतिष्ठीत माणसाकडे आदराने पाहू नका, जगातली सर्व म्हण आणि प्रचंड कामे गरीबांनीच केली आहे. चांगल्या कामाची सुरवात गरीबां कडूनच होते. -  स्वामी विवेकानंद

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भयातून दुख निर्माण होते, भयापोटी मृत्यू येतो आणि भयातूनच वाईट गोष्टी निर्माण होते. -  स्वामी विवेकानंद

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व्क्तीमत्व सुंदर नसेल तर दिसण्याला काहीच अर्थ नाही. कारण सुंदर दिसण्यात आणि सुंदर असण्यात खूप फरक असतो .  -  स्वामी विवेकानंद

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व्देष, कपटवृतीचा त्याग करा व संघटीत होऊन ईतरांची सेवा करायला शिका. -  स्वामी विवेकानंद

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संपूर्ण जग हातात तलवारी घेऊन तुमच्याविरुद्ध उभे ठाकले, तरी ध्येयपूर्तीसाठी पुढे जाण्याची धमक तुमच्यामधी आहे? -  स्वामी विवेकानंद

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सत्यासाठी सर्व गोष्टींचा त्याग करावा:परंतु कोणत्याही कारणास्तव सत्याचा त्याग करू नये. -  स्वामी विवेकानंद

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समता, स्वातंत्र्य, जिज्ञासा, उत्साह, उधोग या बाबतीत पाश्चिमात्यांहूनही अधिक पाश्चिमात्य व्हा. -  स्वामी विवेकानंद

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आस्तिकांपेक्षाही एकवेळ नास्तिक परवडले. कारण नास्तिकाकडे स्वतःचा आणि स्वतंत्र असा तर्कतरी असतो. पण अस्तिकला आपण आस्तिक आहोत ..? याचे एकही समाधानकारक उत्तर देता येत नाही. -  स्वामी विवेकानंद 

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